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Showing posts from December, 2019

Ummid

ऐसे बहुत कम शब्द होते हैं जिनको सुनते-पढ़ते ही एक पूरी-पूरी कहानी ज़ेहन में घूमने लगे। शायद उनमें से ही एक शब्द है। आपके ज़ेहन में क्या आता है? कच्चे से यह उम्मीद के धागे...! हम जिस बात को यूँ ही बोल देते है वह कितनी सार्थक है कि उम्मीद पर ही दुनिया कायम है।   ज़िन्दगी का है बस इक यही सिलसिला  भूल जा pजो हुआ सो हुआ।   प्रेम विकट से विकट परिस्थितियों में भी बना रहता है। जीवन बहता रहता है।कहीं....खुशी सी रहती है!  किसने घोंटा है उम्मीदों का गला? क्या उसे उम्मीद नहीं कोई कुछ यूँ ही😊         बाँसुरी की धुन तो बजा कर देखो।कौन किसको क्या पता। मेरी पायल न थिरक उठे तो कहना।।                                                                                                             ...

Shorr or sannata

Aavaaj uthatee phir dab jaatee hai shor chikhatee chillaatee rishton mein bandh jaatee hai.apnepan ka shor akelaapan bhar jaatee hai,,,kah jaatee agar vo kuchh to hajaar savaalon me gheer jaatee hai. rishton ke vo dhaage bas bandhan tak hee rah jaatee hai,,,jab savaalon ka toophaan babandar aankho mein bhar jaatee hai.jab aankhe band ho jab lab pe tale lagen ho paalathee maar kar baithe ho jaise tum dhyaan kee samaadhi mein talleen ho. lavon se jo vo hansatee hai andar se ghuttee jaatee hai,,,gunaahon ka chola jab khaamoshee kee chaadar ban ab jaatee hai. khaamosh hone se khaamosh ho jaata hai tumhaara gussa khaamosh hone se khushee ka ahasaas hota hai haan aavaaj uthatee phir dab jaatee hai,,, chikhate chillaate apane rishton mein hee bandh jaatee hai...koee tujhe baragalaaye to tum khaamosh ho jaana koee tujhe bhadakaaye to tum khaamosh ho jaana kyonki tumhaaree khaamoshee hee use maat degeekyonki tumhaaree khaamoshee hee negetiv  ka naash karegee khaamoshee hee man ke ga...

Meri khamoshi

मैं और मेरी खामोशी.......................मैं चुप इसलिए नहीं हूँ कि तुम्हारे सवालों के जवाब नहीं हैं मेरे पास....शब्दों के घाव बहुत गहरे और दर्द असहनीय होता है इसका एहसास है मुझे बस इसलिये खामोश हूँ....अभी तो खामोशी,दूर तक छाई है,उजाले की कोई किरण,नज़र मुझे नहीं आई है,कोई नहीं है! साथ,इस जिंदगी के वीराने में,जीवनसाथी बनकर साथ निभाने में,दो बातें हो सकती है!या तो कोई हमारे लायक नहीं,इस ज़माने में,या फिर हम ही काबिल नहीं,किसी की जिम्मेदारी उठाने में,कोई है या नहीं, हे प्रभू!तू क्यूं इतनी देर लगा रहा बताने में,ईक गुप्त रहस्य हो गया है जीवन, किसे मालूम क्या निकले आने वाले,कल के तहखाने में….???कैसे इस भागती हुई ज़िन्दगी में मैंने तुमको इस उम्र में पाया और तुमने भी मुझे इस दुनियाँ की भीड़ में चुना।फिर ख़ामोशी ने ख़ामोशी से  जवाब दिया की भीड़ में भी तुझे तनह पाया इसलिए मैं भी तेरे संग होचली और ऐसा नहीं कि केवल तू ही अकेली है इस धरती पर हर मानव ही यहाँ अकेला है बस लोग अपना सच्चा मित्र अपने से कही बाहर ढूँढ़ते है बल्कि सच तो ये है हर इंसान का सबसे सच्चा मित्र और उसका शत्रु उससे कही बाहर नह...