Ummid
ऐसे बहुत कम शब्द होते हैं जिनको सुनते-पढ़ते ही एक पूरी-पूरी कहानी ज़ेहन में घूमने लगे। शायद उनमें से ही एक शब्द है। आपके ज़ेहन में क्या आता है? कच्चे से यह उम्मीद के धागे...! हम जिस बात को यूँ ही बोल देते है वह कितनी सार्थक है कि उम्मीद पर ही दुनिया कायम है। ज़िन्दगी का है बस इक यही सिलसिला भूल जा pजो हुआ सो हुआ। प्रेम विकट से विकट परिस्थितियों में भी बना रहता है। जीवन बहता रहता है।कहीं....खुशी सी रहती है! किसने घोंटा है उम्मीदों का गला? क्या उसे उम्मीद नहीं कोई कुछ यूँ ही😊 बाँसुरी की धुन तो बजा कर देखो।कौन किसको क्या पता। मेरी पायल न थिरक उठे तो कहना।। ...